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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के केस को रद्द करने की मांग के बारे में बताया है। यह मामला शराब घोटाले से जुड़ा है और इसकी सुनवाई 12 नवंबर तक टाल दी गई है।

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मुख्य घटनाक्रम

  • याचिका: केजरीवाल और सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज केस को रद्द करने की मांग की है।
  • सुनवाई की तारीख: हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 12 नवंबर तक टाल दी है।
  • मुख्य दलील: दोनों नेताओं ने याचिका में तर्क दिया कि ED ने इस मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं ली थी, इसलिए केस को रद्द किया जाना चाहिए।
  • ED का पक्ष: ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि मुकदमा चलाने की मंजूरी ली जा चुकी थी और इसे ट्रायल कोर्ट में पेश भी किया गया है।
  • आप का पक्ष: आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने ED के जवाब का खंडन करते हुए कहा कि नई अनुमति 14 फरवरी, 2025 को रिकॉर्ड पर रखी गई, जबकि ED ने पहले कहा था कि CBI की मंजूरी में ही ED की कार्यवाही शामिल है।
  • अदालत का रुख: कोर्ट ने कहा कि ED ने दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) से मंजूरी ले ली है।

यह मामला अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई पर ही कोई नया घटनाक्रम सामने आएगा।

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  1. चार्जशीट और ट्रायल कोर्ट का संज्ञान:
    • ED ने पिछले साल जुलाई में ट्रायल कोर्ट में केजरीवाल के खिलाफ 7वीं चार्जशीट दायर की थी।
    • ट्रायल कोर्ट ने 9 जुलाई को इस चार्जशीट पर संज्ञान लिया और कहा कि केजरीवाल के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं।
  2. केजरीवाल की हाईकोर्ट में अपील:
    • नवंबर में, केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रायल कोर्ट के संज्ञान लेने वाले आदेश को रद्द करने की मांग की।
    • उन्होंने दलील दी कि जिस समय के आरोपों की बात हो रही है, उस समय वे पब्लिक सर्वेंट (दिल्ली के मुख्यमंत्री) थे और ED के पास केस चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं थी।
  3. सुप्रीम कोर्ट में मामला और फैसला:
    • हाईकोर्ट से मांग खारिज होने के बाद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
    • सुप्रीम कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुनाया और कहा कि पब्लिक सर्वेंट पर सरकार की अनुमति के बिना मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की धाराओं के तहत केस नहीं चलाया जा सकता है।
  4. फैसले का दायरा:
    • 6 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम CBI और राज्य पुलिस पर भी लागू होगा।
  5. ED की अगली कार्रवाई:
    • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, ED ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) से केस चलाने की इजाजत मांगी।

 


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